
अमेरिकी टैरिफ का भारत पर प्रभाव गहरा रहा है। जानिए कैसे भारत नए बाजारों की खोज और पुराने व्यापार मार्गों को मजबूत कर वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित कर रहा है। भारत ने मौजूदा साझेदारों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करके और नए गंतव्यों की खोज करके अमेरिका में हुई बिक्री के नुकसान की भरपाई कर ली है।
पिछले महीने हमने देखा था कि नवंबर के लिए भारत के व्यापार आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए बढ़ते टैरिफ के बावजूद निर्यात में मजबूती बनी हुई है। भारत के कुल निर्यात में वृद्धि तो हुई ही, साथ ही अमेरिका को होने वाले निर्यात में भी उछाल आया। हालांकि, उस समय इसके सटीक कारणों का पता लगाना कठिन था, क्योंकि विस्तृत आंकड़े अभी भी प्रतीक्षित थे। भारत अपनी विशाल उपभोक्ता आबादी और मजबूत घरेलू मांग पर निर्भर है, जो निर्यात पर अमेरिकी दबाव को कम करने में मदद करती है। सरकार ने उपभोक्ता खर्च बढ़ाने के लिए आय कर में राहत और ब्याज दरों में कटौती जैसे उपाय किए हैं।
अमेरिकी टैरिफ का भारत पर प्रभाव वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। जैसे-जैसे अमेरिका अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को कड़ा कर रहा है, भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए निर्यात की राह चुनौतीपूर्ण हो गई है। लेकिन भारतीय नीति निर्माता इसे केवल एक चुनौती नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। भारत अब अपनी निर्यात टोकरी में विविधता लाने और पुराने व्यापारिक संबंधों को फिर से जीवित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
जब हम अमेरिकी टैरिफ का भारत पर प्रभाव का विश्लेषण करते हैं, तो कुछ प्रमुख क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित दिखाई देते हैं स्टील और एल्युमीनियम उच्च आयात शुल्क ने भारतीय निर्यातकों के मुनाफे को कम कर दिया है। आईटी सेवाएं वीजा नीतियों और व्यापारिक प्रतिबंधों का असर भारत के दिग्गज आईटी सेक्टर पर पड़ा है। कृषि उत्पाद अमेरिका द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी और टैरिफ बाधाओं ने भारतीय कृषि निर्यात के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत सरकार ने “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के तहत घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है।