आरएसएस प्रमुख का कहना है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे की राजनीतिक साजिशआरएसएस प्रमुख का कहना है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे की राजनीतिक साजिश
आरएसएस प्रमुख का कहना है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे की राजनीतिक साजिश
आरएसएस प्रमुख का कहना है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे की राजनीतिक साजिश

आरएसएस प्रमुख की यह टिप्पणी निलंबित तृणमूल कांग्रेस सांसद हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण के आह्वान के बाद आई है।

बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश को ऐतिहासिक तथ्यों, RSS प्रमुख के बयान और विशेषज्ञों की राय  बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश भारत के इतिहास का एक ऐसा विषय है, जिसने दशकों तक देश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित किया है। हाल ही में RSS प्रमुख के बयान के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। उनका कहना है कि इस मस्जिद के निर्माण और उससे जुड़ी राजनीति ने समाज के बीच खाई को और गहरा किया।

आरएसएस प्रमुख की यह टिप्पणी निलंबित तृणमूल कांग्रेस सांसद हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण के आह्वान के बाद आई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत ने रविवार (21 दिसंबर, 2025) को कहा कि बाबरी मस्जिद विवाद सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और उस स्थल पर राम मंदिर के निर्माण के साथ समाप्त हो गया है, और ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण को लेकर राजनीतिक साजिश केवल दो समुदायों के बीच दरार को और चौड़ा करेगी।

बाबरी मस्जिद का दोबारा निर्माण करने की कोशिश करके विवाद को फिर से भड़काना एक राजनीतिक साजिश है। यह सब वोटों के लिए किया जा रहा है। यह न तो मुसलमानों के हित में है और न ही हिंदुओं के हित में। यह विवाद समाप्त हो चुका है और सद्भावना बनी हुई थी। इससे दोनों समुदायों के बीच की खाई और चौड़ी होगी,” श्री भागवत ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा।

यह लेख बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश को ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास करता है। बाबरी मस्जिद का निर्माण 16वीं शताब्दी में मुगल शासक बाबर के काल में हुआ माना जाता है। समय के साथ यह धार्मिक स्थल केवल आस्था का विषय न रहकर राजनीति का केंद्र बन गया। इतिहासकारों का मानना है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश का विचार औपनिवेशिक काल में और मजबूत हुआ, जब “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाई गई।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि बाबरी मस्जिद के निर्माण से जुड़ा विवाद एक गहरी राजनीतिक रणनीति का परिणाम रहा है। उनके अनुसार, बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश का उद्देश्य समाज को धार्मिक आधार पर बांटना था। यह बयान इस बात की ओर संकेत करता है कि इतिहास का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबरी मस्जिद विवाद को बार-बार उभारना वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा रहा है। अलग-अलग दौर में अलग-अलग दलों ने बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश को अपने हित में इस्तेमाल किया।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर सामाजिक सौहार्द पर पड़ा। धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ा और आपसी विश्वास कमजोर हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश को समय रहते समझदारी से संभाला जाता, तो समाज में इतनी गहरी दरार नहीं पड़ती। मीडिया ने भी कई बार इस मुद्दे को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत किया। इससे समस्या सुलझने के बजाय और जटिल होती गई।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कानूनी विवाद समाप्त हो गया, लेकिन बाबरी मस्जिद के निर्माण के पीछे राजनीतिक साजिश का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव आज भी महसूस किया जाता है। आज सबसे अधिक आवश्यकता है संवाद, आपसी समझ और संयम की। राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास का दुरुपयोग समाज के लिए घातक हो सकता है। धर्म को राजनीति से अलग रखना जरूरी है इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं किया जाना चाहिए सामाजिक एकता सर्वोपरि होनी चाहिए

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