उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने लखनऊ और कानपुर के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) परियोजना को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच की 67 किलोमीटर दूरी सिर्फ 40 मिनट में तय की जा सकेगी। यह न केवल यात्रा समय को घटाएगी बल्कि औद्योगिक, शैक्षणिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगी।
यह RRTS परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के सहयोग से तैयार की जा रही है। ट्रेनें 160 किमी/घंटा की अधिकतम रफ्तार से चलेंगी और लखनऊ से कानपुर तक के प्रमुख स्टेशनों को जोड़ेगी। इस लाइन में लखनऊ, उन्नाव, चकेरी और कानपुर सेंट्रल जैसे प्रमुख ठिकानों को शामिल किया गया है।
ट्रेनें अत्याधुनिक तकनीक से लैस होंगी — जिनमें ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम, आरामदायक सीटिंग, और रीयल-टाइम सूचना डिस्प्ले जैसी आधुनिक सुविधाएँ होंगी।
कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट :
सरकारी सूत्रों के अनुसार, परियोजना का निर्माण कार्य 2026 की शुरुआत में शुरू होगा और इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी सर्वे का काम पहले ही शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि —
“लखनऊ-कानपुर RRTS प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन परियोजनाओं में से एक होगी। यह सिर्फ दो शहरों को नहीं, बल्कि विकास के दो केंद्रों को जोड़ने का काम करेगी।”
लागत और निवेश :
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹23,000 करोड़ बताई जा रही है। इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं का संयुक्त निवेश होगा। सरकार का दावा है कि यह प्रोजेक्ट ‘विकसित उत्तर प्रदेश 2047’ मिशन के तहत आने वाली सबसे हाई-टेक रेल परियोजना होगी।
यात्रियों और अर्थव्यवस्था को लाभ :
RRTS के शुरू होने के बाद लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी।
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रोजाना करीब 3 लाख यात्रियों को फायदा होने का अनुमान है।
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इससे सड़क ट्रैफिक और प्रदूषण में 25% तक कमी आएगी।
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बिजनेस, एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
इंडस्ट्री चेंबरों का मानना है कि इस परियोजना से दोनों शहरों के बीच इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार होगा, जिससे निवेश और रोजगार के अवसरों में बड़ी बढ़ोतरी होगी।
पर्यावरण के लिए भी राहत :
सरकार का दावा है कि इस ट्रेन सिस्टम से हर साल लगभग 2 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
इसके अलावा स्टेशनों पर सोलर पैनल, वर्षा जल संचयन और हरित ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।
लोगों की प्रतिक्रिया :
स्थानीय नागरिकों और छात्रों में इस खबर को लेकर काफी उत्साह है। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अंकित तिवारी ने कहा —
“कानपुर में कोचिंग या काम के लिए रोजाना जाना बहुत मुश्किल होता है। अगर ट्रेन 40 मिनट में पहुंचा देगी तो हमारा बहुत समय बचेगा।”
