नई दिल्ली: राज्यसभा नए सभापति का भाषण पर विपक्ष ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। विपक्ष की प्रतिक्रिया राज्यसभा में संसदीय परंपराओं, निष्पक्षता और डॉ. राधाकृष्णन के आदर्शों पर जोर दिया गया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
राज्यसभा में आज विपक्ष की ओर से नए ऑनरेबल चेयरमैन को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी गईं। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि सभापति का पद अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण है, और इसके ज़रिए सदन की गरिमा व कार्यवाही की सुचारु संचालन की जिम्मेदारी निभाई जाती है। विपक्ष के नेता ने अपने संबोधन में कहा कि मैं आज अपनी ओर से और सभी विपक्षी सदस्यों की ओर से आपको इस उच्च पद की बागडोर संभालने पर हार्दिक felicitation देता हूं।
राधाकृष्णन के शब्दों का उद्धरण नेता प्रतिपक्ष ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा 1952 में कही गई बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार मिले। उन्होंने कहा डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था कि वह किसी पार्टी से नहीं, बल्कि सदन की हर पार्टी से जुड़े हैं। पारदर्शिता और निष्पक्षता ही लोकतंत्र की बुनियाद है।
नए चेयरमैन से अपेक्षाएँ विपक्ष ने नई अध्यक्षता से उम्मीद जताई कि वह सदन के सभी पक्षों को समान अवसर देंगे और निष्पक्षता से कार्यवाही का संचालन करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा—
राज्यसभा सरकार जितनी ही विपक्ष की भी है। इसलिए सदन में सबकी आवाज़ को बराबर महत्व दिया जाना चाहिए। पिछले चेयरमैन के अचानक त्यागपत्र पर टिप्पणी अपने संबोधन में विपक्ष ने पिछले सभापति के अचानक इस्तीफे का भी उल्लेख किया और कहा कि यह संसदीय इतिहास में दुर्लभ घटना रही।
अंतिम अपील अंत में विपक्ष की ओर से कहा गया— सभापति जी, आप दोनों तरफ बराबरी से देखें। संतुलन ही संसदीय लोकतंत्र की आत्मा है। हम आपके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएँ देते हैं।
