
अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और आतंकवाद, सीमा सुरक्षा व कानून-व्यवस्था परअहम फैसले लिए। केंद्रीय गृह मंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ‘आतंकवाद मुक्त जम्मू और कश्मीर’ के लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करना सुनिश्चित करें। गृह मंत्री अमित शाह की जम्मू-कश्मीर सुरक्षा समीक्षा बैठक में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर बड़ा फैसला लिया गया।
श्री शाह ने गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन कुमार डेका, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल दुल्लू, जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार, जम्मू और कश्मीर में चिरस्थायी शांति स्थापित करने और आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए कटिबद्ध है। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के निरंतर और समन्वित प्रयासों के कारण जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद का इकोसिस्टम ध्वस्त हो गया है।
गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवादी ढांचे और आतंकवादियों की फंडिंग को टारगेट करके आतंकरोधी अभियानों को mission mode में जारी रखा जाना चाहिए। केन्द्रीय गृह मंत्री ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को चौकसी बरतने का निर्देश दिया और तालमेल के साथ काम करते हुए अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद हासिल हुई उपलब्धियों को बरकरार रखने और ‘आतंक मुक्त जम्मू-कश्मीर’ के लक्ष्य को जल्द प्राप्त करने के लिए कार्य करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रयास में सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की वर्तमान स्थिति का बारीकी से आकलन किया। बैठक में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, एनएसए अजीत डोभाल और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। अमित शाह की जम्मू-कश्मीर सुरक्षा समीक्षा का प्राथमिक लक्ष्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को रोकना और स्थानीय स्तर पर पनप रहे हाइब्रिड उग्रवाद को पूरी तरह खत्म करना है। सरकार का मानना है कि जब तक सुरक्षा ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक निवेश और विकास की गति को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। इसलिए, गृह मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने के लिए पड़ोसी मुल्क की खुफिया एजेंसी आइएसआइ व आतंकी संगठनों द्वारा व्हाइट कालर टेरर माडयूल तैयार करने के षडयंत्र को विफल बनाने और प्रदेश में जारी आतंकराेधी अभियानों की रणनीति पर चर्चा होगी। वर्ष 2026 में गृहमंत्री द्वारा जम्मू कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा के लिए बुलाई गई यह पहली बैठक है। इससे पूर्व गत अक्टॅबर में भी गृहमंत्री ने fदल्ली में जम्मू कश्मीर के सुरक्षा हालात पर एक बैठक बुलाई थी।
गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति को मज़बूत करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की भी सराहना की। श्री शाह ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और तालमेल बनाकर काम करते रहने का निर्देश दिया ताकि अनुच्छेद-370 हटाने के बाद हासिल स्थिति को बनाए रखा जा सके। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जल्द से जल्द आतंकवाद मुक्त जम्मू और कश्मीर का लक्ष्य भी हासिल किया जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस अभियान में सभी प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि गृहमंत्री लगभग हर तीन माह बाद जम्मू कश्मीर के हालात की एक समीक्षा बैठक आयोजित करते हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तैयारियों, आतंकवाद-रोधी अभियानों की स्थिति और क्षेत्र में विकास से जुड़े स्थायित्व उपायों का मूल्यांकन किया जाता है। उन्होंने बताया fक प्रस्तावित बैठक में जम्मू-कश्मीर की समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ आतंकवाद-रोधी अभियानों की प्रगति का मूल्यांकन होगा।