बिहार चुनाव 2025: तेजस्वी बनाम बीजेपी, 3000 करोड़ और घुसपैठ पर सियासी जंग
बिहार चुनाव 2025 का दूसरा चरण खत्म होते-होते मुकाबला अब साफ हो गया है। एनडीए की ओर से अब तक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया गया, जबकि विपक्ष के पास सिर्फ एक नाम है — तेजस्वी यादव। नतीजतन, यह लड़ाई तेजस्वी बनाम बीजेपी में बदल चुकी है। इस बार चुनाव में मुद्दे सिर्फ राजनीतिक नहीं, आर्थिक और भावनात्मक दोनों हैं। सरकार द्वारा चुनाव से पहले महिलाओं, बुजुर्गों और बेरोजगारों के खातों में 3000 करोड़ रुपये की योजनाएँ जारी की गईं, जिसे विपक्ष “चुनावी रिश्वत” बता रहा है। अमित शाह अपने भाषणों में इसे विकास योजनाएँ कहते हैं, लेकिन साथ ही घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठाकर ध्रुवीकरण की कोशिश भी कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव लगातार 17–19 रैलियाँ प्रतिदिन कर रहे हैं और बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा को केंद्र में रखकर प्रचार चला रहे हैं। उनका कहना है कि एक 37 साल के नौजवान को रोकने के लिए केंद्र सरकार की पूरी ताकत लग गई है। उन्होंने हर परिवार को एक सरकारी नौकरी, महिलाओं को ₹1000 सहायता और किसानों को फ्री बिजली देने का वादा किया है। दूसरी ओर, अमित शाह और बीजेपी की रणनीति पूरी तरह अलग है। शाह का कहना है घुसपैठिए हमारे युवाओं की नौकरी छीन रहे हैं। हम एक-एक को निकालेंगे।
उनके मुताबिक, सीमांचल से लेकर मिथिलांचल तक एनडीए की सरकार ने महिला सशक्तिकरण और पेंशन योजनाओं में काम किया है। चुनावी सभाओं में शाह बार-बार “जय श्री राम” का नारा लगवाकर भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले ढाई साल में हर जीविका दीदी के खाते में ₹2 लाख डाले जाएंगे और विधवा पेंशन ₹1100 तक बढ़ाई जाएगी। मगर बीजेपी ने अब तक यह नहीं बताया कि अगर जीत हुई तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे या नहीं। यही अनिश्चितता एनडीए के अंदर तनाव का कारण बन गई है। उधर, राहुल गांधी भी किशनगंज और सीमांचल की सभाओं में सक्रिय हुए। उन्होंने अमित शाह के घुसपैठ वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा हम नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने निकले हैं।
राहुल ने बिहार में वोटर लिस्ट की धांधली और बेरोजगारी पर केंद्र को घेरा, जबकि बीजेपी ने उनके “घुसपैठ बचाओ यात्रा के आरोपों को नकार दिया। इस चुनाव में जनता के सामने विकल्प हैं एक तरफ वादा आधारित राजनीति (तेजस्वी यादव के रोजगार और सामाजिक न्याय के वादे), दूसरी तरफ पहचान आधारित राजनीति (बीजेपी का राष्ट्रवाद और घुसपैठ का मुद्दा)। बिहार चुनाव 2025 का असली सवाल यह है कि क्या जनता पैसे और योजनाओं से प्रभावित होगी या “मुद्दों और बेरोजगारी” से बदलाव चाहेगी 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान होगा और 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। यह नतीजे तय करेंगे कि बिहार की जनता तेजस्वी को मौका देती है या बीजेपी-नीतीश की जोड़ी को एक बार फिर सत्ता में लौटाती है।
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