जन अधिकार पार्टी के “चलो गाँव की ओर” अभियान के तहत मनोहरपुर में शिवकन्या कुशवाहा का संबोधन, जातिगत जनगणना और किसानों के हित में उठाई आवाज़
मथुरा (उत्तर प्रदेश):
जन अधिकार पार्टी के तत्वावधान में चल रहे “चलो गाँव की ओर” अभियान के अंतर्गत आज जनपद मथुरा के मनोहरपुर में एक जनसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती शिवकन्या कुशवाहा ने उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्हें जन अधिकार पार्टी की नीतियों एवं विचारधारा से अवगत कराया और पार्टी को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा —
“बड़े गर्व से हम कहते हैं कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें संविधान दिया। अब समय आ गया है कि देश में जातिगत जनगणना कराई जाए। जब उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जा सकते हैं, तो किसानों और छोटे व्यापारियों के कर्ज क्यों नहीं माफ किए जाते?”
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि वे चाहते हैं कि उनके बच्चे आगे बढ़ें और समाज में समान अवसर प्राप्त करें, तो उन्हें अपने वोट की ताकत को पहचानना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने देश की आज़ादी के लिए खून-पसीना बहाया, लेकिन आज भी समाज का बड़ा वर्ग शोषित और उपेक्षित है।
श्रीमती कुशवाहा ने कहा —
“बाबू जगदेव प्रसाद ने पिछड़ों के अधिकारों के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा था ‘100 में 90 शोषित हैं, शोषितों ने ललकारा है — धन, धरती और राजपाट में 90 भाग हमारा है।’ आज भी 10 प्रतिशत लोग शासन कर रहे हैं और 90 प्रतिशत समाज हाशिए पर है।”
उन्होंने जनता से आह्वान किया कि संघर्ष तलवार से नहीं, बल्कि वोट की ताकत से किया जाए।
“किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह जी कहा करते थे — एक नजर खेत-खलिहान पर रखो और दूसरी नजर विधानसभा और लोकसभा पर।”
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा खतरे में है, अपराध बढ़ रहे हैं, और थानों में आम जनता की सुनवाई नहीं होती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति बनी रही तो सरकार संविधान की मूल भावना को कमजोर कर देगी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि 2026 के जिला पंचायत चुनावों में जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशियों को समर्थन दें ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी अपनी सरकार बना सके।
अंत में उन्होंने कहा कि पार्टी के संस्थापक माननीय बाबू सिंह कुशवाहा जी का स्पष्ट संदेश है —
“देश में जातिगत जनगणना होनी चाहिए और जिस समाज की जितनी आबादी है, उसे उसी अनुपात में शिक्षा, रोजगार और राजनीति में हिस्सा मिलना चाहिए। साथ ही सभी के लिए समान शिक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।”
