उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की बेटी प्रिया मौर्य की मौत को आज एक साल पूरा होने वाला है। यह सिर्फ एक छात्रा की आत्महत्या नहीं थी,

बल्कि उस व्यवस्था पर गहरा सवाल था, जो बेटियों की सुरक्षा का दावा तो करती है, लेकिन जब न्याय दिलाने का वक्त आता है तो हाथ-पांव फूल जाते हैं।


 25 सितंबर 2024: वह काला दिन

फतेहपुर जिले के खागा कस्बे में रहने वाली 12वीं की छात्रा प्रिया मौर्य रोज़ की तरह सरस्वती बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पढ़ने गई थी।
लेकिन उस दिन की कहानी हमेशा के लिए इतिहास का हिस्सा बन गई।

जानकारी के मुताबिक, स्कूल बस का ड्राइवर शिवशरण सिंह लंबे समय से प्रिया से छेड़छाड़ करता था।

हिम्मत जुटाकर प्रिया ने इस बारे में स्कूल के प्रिंसिपल राज कपूर सिंह को शिकायत की।
लेकिन यहां से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।

कार्रवाई करने के बजाय प्रिंसिपल ने ड्राइवर की जगह प्रिया को ही अपमानित किया और पीटा

यह अन्याय और अपमान प्रिया बर्दाश्त नहीं कर सकी।
गुस्से और दुख में उसने कक्षा छोड़ दी और दूसरी मंज़िल से छलांग लगा दी।

गंभीर हालत में प्रिया को कानपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ तीन दिन तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद,

28 सितंबर 2024 को प्रिया ने दम तोड़ दिया।


 इंसाफ अधूरा क्यों?

प्रिया की मौत के बाद पूरे फतेहपुर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गुस्सा भड़क उठा।
सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे, रैलियाँ हुईं, मोमबत्तियाँ जलाई गईं और इंसाफ की मांग की गई।

लोगों का कहना था कि यह सिर्फ़ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है।

लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी सवाल वही हैं:

  • ड्राइवर और प्रिंसिपल को कड़ी सज़ा क्यों नहीं मिली?

  • पुलिस ने कई दिनों तक आरोपियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया?

  • योगी सरकार की “बुलडोज़र पॉलिसी” यहाँ क्यों नहीं चली?

  • क्या पिछड़ी जाति से आने वाली एक बेटी की मौत इतनी “साधारण”

  • थी कि प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया?

🔥 चंद्रगुप्त मौर्य की अपील

मौर्य समाज के युवा क्रांतिकारी चंद्रगुप्त मौर्य ने इस घटना को “व्यवस्था की असफलता”

बताते हुए एक बड़ा ऐलान किया है।

उन्होंने कहा है:

“28 सितंबर 2025 को पूरे प्रदेश में जगह-जगह मोमबत्तियां जलाकर प्रिया मौर्य को श्रद्धांजलि दी जाएगी। यह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं होगी,

बल्कि एक संदेश होगा कि हमारी बेटियों पर हुए अत्याचार को हम भूलेंगे नहीं। न्याय की लड़ाई हमें लड़नी है

और हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक अपराधियों को सजा नहीं मिलती।”

चंद्रगुप्त मौर्य ने समाज से यह भी सवाल किया कि कितने नेताओं ने इस मुद्दे पर खुलकर आवाज़ उठाई? कितनों ने श्रद्धांजलि सभा आयोजित की?


 सरकार पर सवाल

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अक्सर अपराधियों पर बुलडोज़र चलाने और एनकाउंटर की बात करती है।
लेकिन जब सवाल प्रिया मौर्य जैसी बेटियों की सुरक्षा का आता है, तो प्रशासन चुप क्यों है?

लोग पूछ रहे हैं कि क्या न्याय सिर्फ़ चुनिंदा मामलों में ही होता है? क्या बेटियों की जान इतनी सस्ती है

कि उनका मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है?


 श्रद्धांजलि का संकल्प

28 सितंबर 2025 को जब प्रिया मौर्य की पहली पुण्यतिथि मनाई जाएगी, तो यह सिर्फ़ एक रस्म नहीं होगी।
यह दिन समाज को यह याद दिलाएगा कि:

  • न्याय अब तक अधूरा है।

  • बेटियों की सुरक्षा के लिए हमें और मजबूत होना होगा।

  • जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

प्रिया मौर्य का मामला हमें यह सिखाता है कि न्याय के लिए सिर्फ़ सरकार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।
समाज को जागरूक होना होगा, अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी और बेटियों के हक़ की लड़ाई खुद लड़नी होगी।

हम सभी से अपील करते हैं कि 28 सितंबर को मोमबत्तियां जलाकर प्रिया को श्रद्धांजलि दें और इस संकल्प के साथ

आगे बढ़ें कि अब किसी बेटी को इंसाफ से वंचित नहीं रहना पड़ेगा।

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