बिहार डिप्टी सीएम विवाद पर भाजपा और जदयू ने चिराग पासवान की डिप्टी सीएम मांग को नकार दिया है। नई सरकार बनने से पहले NDA में तनाव बढ़ता दिख रहा है। जानिए पूरा मामला, कारण और इसके राजनीतिक असर।
बिहार डिप्टी सीएम विवाद एक बार फिर राज्य की राजनीति में नए तनाव की वजह बन गया है। नई बिहार सरकार के शपथ ग्रहण से ठीक पहले NDA के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। भाजपा और जदयू ने सहयोगी दल LJP (रामविलास) की इस मांग को मानने से इंकार कर दिया है कि चिराग पासवान की पार्टी को एक डिप्टी सीएम पद दिया जाए। एलजेपी (रामविलास) का तर्क है कि उनकी पार्टी ने NDA को मजबूत जनसमर्थन दिया है और दलित वोटों में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार में अहम पद की मांग उठाई थी। लेकिन NDA के दो बड़े घटक—भाजपा और जदयू—ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसके बाद गठबंधन के भीतर असंतोष बढ़ गया है। विवाद की शुरुआत कैसे हुई? नई सरकार के गठन से पहले एनडीए ने मंत्री पद और शक्ति बंटवारे पर बातचीत शुरू की। इसी दौरान एलजेपी (आरवी) ने दावा किया कि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए, क्योंकि वे NDA में गंभीर राजनीतिक योगदान” दे रहे हैं। हालांकि भाजपा का रुख साफ है— डिप्टी सीएम पद पहले उनके दो नेताओं के पास था भाजपा इस संरचना को बनाए रखना चाहती है जदयू भी एलजेपी के बढ़ते दबदबे से असहज हैयही कारण है कि दोनों दल एक सुर में चिराग पासवान की मांग का विरोध कर रहे हैं। BJP-JDU की आपत्ति क्या है?सत्ता संतुलन बिगड़ने का डर यदि एलजेपी को डिप्टी सीएम पद मिल जाता है, तो NDA में शक्ति संतुलन बदल जाएगा।
भाजपा और जदयू नहीं चाहते कि कोई तीसरा दल बराबरी की ताकत” हासिल करे। मंत्री पदों की जटिल गणित नई सरकार में 5 दल शामिल हैं।
हर दल को विभाग देना, संतुलन बैठाना और शक्ति निर्माण करना एक बड़ा राजनीतिक समीकरण है एलजेपी के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता दलित वोट बैंक पर एलजेपी का मजबूत पकड़ NDA के दोनों बड़े दलों में बेचैनी पैदा कर रहा है। एलजेपी क्यों जिद पर है? चिराग पासवान खुद को नई पीढ़ी के नेता” के रूप में स्थापित कर रहे हैं वे केंद्रीय राजनीति में भी निर्णायक बनना चाहते हैं पार्टी को लगता है कि उसकी अहमियत बढ़ी है और उसे सरकारी ढांचे में बड़ा हिस्सा मिलना चाहिए इस मांग का मक़सद सिर्फ पद पाना नहीं, बल्कि राजनीतिक ऊँचाई हासिल करना भी है।आगे क्या हो सकता है? अगर डिप्टी सीएम पद एलजेपी को मिलता है NDA में छोटे दलों की शक्ति बढ़ जाएगी राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है भाजपा-जदयू नेतृत्व कमजोर होने की संभावना अगर मांग खारिज जाती है (जो अभी दिख रहा है) एलजेपी असंतुष्ट होकर अपने दबाव की राजनीति तेज करेगी भविष्य में सीट-बंटवारे के दौरान तनाव बढ़ेगा दलित राजनीति नए मोड़ ले सकती है NDA सरकार पर इसका क्या असर पड़ेगा? नई सरकार का शपथ ग्रहण नजदीक है। ऐसे में यह विवाद गठबंधन की “शुरुआती दरार” माना जा रहा है।
अगर मसला जल्द नहीं सुलझा, तो: सरकार गठन में देरी मंत्री सूची में विवाद भविष्य में अस्थिरता
जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
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