लखनऊ, 2 अक्टूबर 2025 — उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी लखनऊ के गांधी आश्रम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में उन्होंने माल्यार्पण किया, रामधुन सुनी और गांधीजी के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए खादी, स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

गांधी जयंती के मौके पर लखनऊ स्थित ऐतिहासिक गांधी आश्रम में सुबह से ही कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और राष्ट्रपिता को याद किया। इस दौरान राज्यपाल, मंत्रिमंडल के कई सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत भजन-कीर्तन और “वैष्णव जन तो” जैसे गांधीजी के प्रिय गीतों से हुई। रामधुन गूंजते ही पूरा वातावरण श्रद्धा और अनुशासन से भर गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी न केवल स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे, बल्कि उनका जीवन और उनके विचार आज भी भारत को मार्गदर्शन देते हैं।

योगी ने कहा,

“गांधीजी का सत्य और अहिंसा का मार्ग हमें हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उनका स्वदेशी और स्वावलंबन का मंत्र आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के रूप में जीवंत है। हमें खादी और स्थानीय उत्पादों को अपनाकर उनके सपनों को साकार करना चाहिए।”

इसके बाद मुख्यमंत्री ने गांधी आश्रम का भ्रमण किया और खादी वस्त्र, हस्तशिल्प व ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।

योगी आदित्यनाथ का संदेश और खादी का महत्व :

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विशेष रूप से खादी और स्थानीय उत्पादों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया वैश्वीकरण के दौर से गुजर रही है, तब गांधीजी का “स्वदेशी” मंत्र और भी प्रासंगिक हो गया है।

योगी ने कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं है, बल्कि यह स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और ग्राम्य जीवन का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों और खास मौकों पर खादी वस्त्रों को प्राथमिकता दें।

साथ ही, मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की “एक जिला – एक उत्पाद (ODOP)” योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह गांधीजी के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों को ही आगे बढ़ा रही है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के हर जिले को उसकी पारंपरिक कला, शिल्प और उत्पाद से जोड़कर रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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