देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले का रहने वाला धीरज सैनी, जो इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष का मेधावी छात्र था, अपने हॉस्टल के कमरे नंबर A-123 में मृत पाया गया। हैरानी की बात यह है कि चार दिन तक उसके कमरे से दुर्गंध आती रही, मगर किसी को यह देखने की फुर्सत नहीं मिली कि छात्र जिंदा है या मर चुका।


संघर्षों से सफलता तक… और फिर खामोशी

धीरज कोई आम छात्र नहीं था।
उसके ताऊ सतेंद्र सैनी ने बताया —

“हमने फलों का ठेला लगाकर इस बच्चे को पढ़ाया था। घर की हालत कमजोर थी, लेकिन उसकी मेहनत ने पूरे गांव का सिर ऊंचा कर दिया। उसने सोचा था कि इंजीनियर बनकर परिवार की किस्मत बदलेगा… पर हमें क्या पता था कि IIT की लापरवाही ही उसकी जान ले लेगी।”

परिवार का कहना है कि जब चार दिन तक धीरज बाहर नहीं दिखा, तब प्रबंधन को खुद जाकर दरवाज़ा खटखटाना चाहिए था। लेकिन जब दरवाज़ा आखिरकार तोड़ा गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


“तीन दिन पहले फोन किया था, पर उसने उठाया नहीं…”

धीरज के चाचा संदीप सैनी ने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले उसे कॉल किया था, मगर उसने फोन नहीं उठाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि शव लगभग चार दिन पुराना था।
गुरुवार दोपहर परिवार पोस्टमार्टम के बाद शव को लेकर हरियाणा रवाना हो गया।

IIT प्रबंधन पर उठे सवाल :

अब बड़ा सवाल यह है —

                 “क्या IIT जैसे संस्थान में किसी छात्र का चार दिन तक गायब रहना किसी की नजर में नहीं आया?”

                 “क्या वहां छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई निगरानी नहीं रखी जाती?”

IIT कानपुर में इससे पहले भी छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं हो चुकी हैं। फिर भी काउंसलिंग सेल और निगरानी व्यवस्था केवल कागजों में ही सक्रिय लगती है।


देश के टॉप कॉलेजों में बढ़ते सन्नाटे :

देश के बड़े-बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में लगातार बढ़ती आत्महत्याओं ने शिक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या IITs केवल रैंक और रिजल्ट के लिए हैं, या फिर इन दीवारों के पीछे किसी की आवाज़ अब भी अनसुनी रह जाती है?

संपादकीय 

यह खबर केवल एक मौत की कहानी नहीं है — यह प्रबंधन की संवेदनहीनता और समाज के मौन का आईना है।
हम सबको यह सोचना होगा कि जब अगला “धीरज” चुप हो जाएगा, तब क्या हम फिर चार दिन इंतजार करेंगे?

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