जन अधिकार पार्टी स्थापना दिवस 2025 प्रयागराजजन अधिकार पार्टी स्थापना दिवस 2025 प्रयागराज

जन अधिकार पार्टी स्थापना दिवस 2025  प्रयागराज में उमड़ा जनसैलाब, 2027 की राजनीति के संकेत
प्रयागराज।
जन अधिकार पार्टी का स्थापना दिवस समारोह 16 दिसंबर 2025 को प्रयागराज के राजर्षि टंडन मंडपम्, 12 सम्मेलन मार्ग (चंद्रलोक सिनेमा के पास) में भव्य रूप से मनाया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।

समारोह के मुख्य अतिथि जन अधिकार पार्टी के संस्थापक एवं जौनपुर के सांसद बाबू सिंह कुशवाहा रहे तथा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकन्या कुशवाहा मौजूद रही तथा इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्ञान प्रकाश मौर्य, अजीत कुशवाहा, डॉ. संतोष लोधी, लाखन राज पासी, विजय नारायण पटेल, चंद्रसेन पाल, इरफान इरशाद, पंकज मनु विश्वकर्मा और राजेश कुशवाहा समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।

जेल से संघर्ष और पार्टी निर्माण की कहानी
बाबू सिंह कुशवाहा ने जेल से बाहर आने के बाद जन अधिकार पार्टी की स्थापना की और पूरे उत्तर प्रदेश में जनसंपर्क यात्रा निकालकर अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास कराया। यह यात्रा लखनऊ से शुरू होकर प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंची। इसके बाद हर वर्ष पार्टी द्वारा रथ यात्रा निकालकर लगातार जनसंपर्क किया गया।

जन अधिकार पार्टी की स्थापना 9 दिसंबर 2016 को हुई थी, जबकि पार्टी को आधिकारिक मान्यता 16 दिसंबर 2016 को प्राप्त हुई। इसी कारण मान्यता की वर्षगांठ पर स्थापना दिवस समारोह मनाया गया।
वंचित-पिछड़ों की आवाज बनती जन अधिकार पार्टी
जन अधिकार पार्टी स्वयं को वंचित, पिछड़े और शोषित वर्गों की आवाज बताती है।

पार्टी का प्रमुख नारा —
जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। गरीब हो या धनवान, सबको शिक्षा एकसमान।”
पार्टी नेताओं का कहना है कि यह नारा कभी बहुजन समाज पार्टी की पहचान था, लेकिन आज उससे भटकाव आ गया है। बाबू सिंह कुशवाहा इसे मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

बाबू सिंह कुशवाहा का कहना है कि सत्ता में आने पर समा

जन अधिकार पार्टी स्थापना दिवस 2025
जन अधिकार पार्टी स्थापना दिवस 2025

न शिक्षा व्यवस्था और जाति जनगणना लागू की जाएगी, ताकि हर वर्ग को उसकी आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी मिल सके।
सामाजिक पकड़ और बढ़ता जनाधार

हालांकि सोशल मीडिया पर बाबू सिंह कुशवाहा की उपस्थिति सीमित मानी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत बताई जाती है। कुशवाहा समाज के साथ-साथ कुर्मी, पाल समेत कई ओबीसी समुदायों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।

इस कार्यक्रम में प्रदेश के तमाम जिलों से कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को बुलाया गया। मंच से लेकर सभागार तक भरा दिखाई दिया ,स्थापना दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले से कार्यकर्ता पहुंचे। इसके अलावा मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में समर्थक प्रयागराज पहुंचे, जिससे कार्यक्रम एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया।

भाजपा और केशव मौर्य की राजनीति पर असर —
कार्यक्रम में जुटी भीड़ को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय जनता पार्टी में खासा हलचल है। खासकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की राजनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि समाज के मुद्दों पर उनकी चुप्पी से मौर्य समाज में असंतोष बढ़ा है।

लोकसभा चुनावों में मौर्य समाज के वोट बैंक का झुकाव समाजवादी पार्टी की ओर जाना इसी असंतोष का संकेत माना जा रहा है, जिसमें बाबू सिंह कुशवाहा और जन अधिकार पार्टी की भूमिका अहम बताई जा रही है।

फिलहाल जन अधिकार पार्टी के संस्थापक के तौर पर अब बाबू सिंह कुशवाहा दिखाई देते हैं और उनकी पत्नी शिवकन्या कुशवाहा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. हाल ही में 5 सितंबर को बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी जन अधिकार पार्टी ने लखनऊ में बिहार लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा की शहादत दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया था |

जिस कार्यक्रम मे भी बहुत अधिक संख्या मे भीड़ उमड़ी दिखाई दी थी जिस से ये साफ पता चलता है की प्रदेश मे जन अधिकार पार्टी की एक अलग ही पहचान के रूप मे निखर रही हैं।

जन अधिकार पार्टी स्थापना दिवस 2025
जन अधिकार पार्टी स्थापना दिवस 2025

2027 का संकेत —
राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकन्या कुशवाहा ने कहा कि 2026 की राजनीतिक गतिविधियां सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करेंगी। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस पर उमड़ी भीड़ 2027 के चुनाव के लिए बड़ा संकेत है। जिसके लिए बाबू सिंह कुशवाहा ने 2027 ने अपनी उस ज़मीन को फिर खाद पानी देना शुरू कर दिया है |

जिस सफर की शुरुआत बाबू सिंह कुशवाहा ने लंबे संघर्षों के बाद गाजियाबाद की डासना जेल से बाहर आते ही कर दी थी। जिससे बाबू सिंह कुशवाहा की अपनी जन अधिकार पार्टी ने यूपी की राजनीति में धीमे धीमे अपने कैडर को 2027 के चुनाव के लिए साफ संदेश दे दिया है.

इससे पहले 9 दिसंबर को फतेहपुर में आयोजित विशाल जनसभा में भी भारी भीड़ जुटी थी, जहां अर्जक संघ के संस्थापक रामस्वरूप वर्मा को याद किया गया और कुर्मी समाज की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
लगातार हो रहे बड़े आयोजनों से यह साफ है कि जन अधिकार पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने कैडर और जनाधार को मजबूत करने में जुट गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में जिस ओर जन अधिकार पार्टी का रुख होगा, उसी ओर सत्ता का पलड़ा भारी हो सकता है।

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