अखिलेश यादव बिहार चुनाव प्रचार रैली में संबोधित करते हुएअखिलेश यादव बिहार चुनाव प्रचार रैली में संबोधित करते हुए

अखिलेश यादव बिहार चुनाव प्रचार में पूरे जोश से जुटे हैं। 23 से अधिक सभाओं में उन्होंने बीजेपी और नीतीश कुमार पर निशाना साधा। जानिए कैसे बिहार में महागठबंधन को मज़बूती दे रहे हैं अखिलेश यादव।

अखिलेश यादव बिहार चुनाव प्रचार में इस बार पहले से कहीं अधिक सक्रिय हैं। वे रोज़ लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से उड़ान भरकर बिहार के अलग-अलग जिलों में रैलियाँ कर रहे हैं। इस बार वे तेजस्वी यादव, राहुल गांधी या प्रियंका गांधी के साथ नहीं बल्कि स्वतंत्र रैलियों के ज़रिए जनता तक पहुँच रहे हैं। क्यों बढ़ी अखिलेश की रैलियों की संख्या अब तक अखिलेश यादव बिहार में 23 से अधिक सभाएँ कर चुके हैं। उनका संदेश साफ़ है  बिहार में महागठबंधन की सरकार बनवाने आए हैं हम, यूपी से प्रेम, मोहब्बत और पीडीए का संदेश लाए हैं। उनके प्रचार में पीडीए (पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक) का प्रतीक चिन्ह भी प्रमुख रूप से दिख रहा है।  बिहार में अखिलेश यादव की मुख्य रणनीति अखिलेश यादव का फोकस नीतीश कुमार की विश्वसनीयता और बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर है। वे कहते हैं कि बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनने देगी।

वे जनता से अपील कर रहे हैं कि यह चुनाव सिर्फ़ सरकार बदलने का नहीं बल्कि 30 साल का हिसाब लेने का चुनाव है। अवधेश प्रसाद की भूमिका अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद भी बिहार प्रचार में सक्रिय हैं। उन्होंने जमुई और गया में कई सभाएँ कीं। पासी समाज तक पहुँचने के लिए अखिलेश यादव ने उन्हें आगे बढ़ाया है। अवधेश प्रसाद ने कहा हम अवध में जीते हैं और मगध में आए हैं, बीजेपी को हराने आए हैं।  अखिलेश के भाषणों की खास बातें

अखिलेश यादव की भाषा में व्यंग तो है, पर नफ़रत नहीं। वे मोदी और योगी पर तीखा प्रहार करते हैं लेकिन बिना कटाक्ष को हिंसक बनाए।
वे कहते हैं  ये जो बाहर से प्रोफेसर आते हैं, नोटबंदी कराने वाले, बंडल जमा करने वाले — अब बिहार में ना बंडल चलेगा, ना बंडलबाज़। उनकी भाषा सहज और व्यावहारिक है, जो आम जनता को जोड़ती है। नीतीश कुमार और बीजेपी पर वार अखिलेश ने कहा कि बीजेपी “तीर” (जेडीयू) को अंदर ही अंदर कमजोर कर रही है। ऊपर से दोस्ती, अंदर से तीर चला रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि बीजेपी चुनावी दूल्हों को मुख्यमंत्री नहीं बनने देती।  मीडिया कवरेज और विपक्ष की चुनौती

अखिलेश की सभाओं को राष्ट्रीय मीडिया कम दिखा रही है। वे कहते हैं  अगर हमसे गलती होती तो गोदी मीडिया दिन-रात दिखाता। फिर भी वे हर सभा में महंगाई, बेरोज़गारी और अग्निवीर जैसे मुद्दे उठा रहे हैं, जो आम लोगों के जीवन से सीधे जुड़े हैं। जनता और मुद्दों से जुड़ा भाषण उनके भाषणों में नौजवानों किसानों और गरीबों की बात सबसे ऊपर है। 40000 रुपये में मोटरसाइकिल मिलती थी आज लाखों में। ये विश्वगुरु लोग क्या सिखा रहे हैं अखिलेश बिहार में आर्थिक और सामाजिक न्याय का मुद्दा केंद्र में ला रहे हैं। नतीजों पर संभावित असर अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद की सक्रियता से बिहार में महागठबंधन का जनाधार मजबूत हो रहा है। जनता में यह संदेश जा रहा है कि यह बराबरी का चुनाव नहीं बल्कि सावधानी बनाम संसाधन की लड़ाई है।

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